सागर जिले की बांदा तहसील में जहरीली शराब से 29 लोगों की मौत, सावधान शराब छोड़े और नारियल पानी से नाता जोड़ जेएमएस न्यूज़ आप तक

BY LAKHAN LAL EDITOR JMS NEWS AAP TAK

नशामुक्ति के दावों के बीच जहरीली शराब का कहर!

सागर में मौतों के बाद भी सवाल कायम—फैक्ट्री से बाजार तक कौन चला रहा था जहरीली शराब का नेटवर्क?

JMS NEWS विशेष रिपोर्ट | सागर BY AMAN KUMAR RAJAK

मध्यप्रदेश सरकार लगातार प्रदेश को नशामुक्त बनाने और अवैध शराब के कारोबार पर शिकंजा कसने की बात कहती रही है, लेकिन सागर जिले के बंडा क्षेत्र में सामने आई जहरीली शराब की त्रासदी ने सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

बंडा तहसील के कई गांवों में संदिग्ध जहरीली शराब के सेवन के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ी और मौतों का सिलसिला सामने आया। शुरुआती रिपोर्टों में जहां 9 से 11 मौतों की बात सामने आई, वहीं 7 सितंबर तक सरकारी सूत्रों के हवाले से मृतकों की संख्या 12 बताई गई। बाद की रिपोर्टों में यह आंकड़ा और बढ़ने की खबरें सामने आई हैं।

30 आरोपी नामजद, 14 गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में 30 आरोपियों को नामजद किया है और 7 सितंबर तक 14 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई थी। जांच का दायरा अवैध शराब के नेटवर्क और उसकी सप्लाई तक बढ़ाया गया है।

यानी मामला सिर्फ कुछ लोगों द्वारा अवैध शराब बेचने तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि शराब कहां तैयार हुई, कहां से आई, किसने स्टोर की और किन लोगों के जरिए गांवों तक पहुंची।

प्रशासन मौके पर, फिर भी सवाल क्यों?

घटना सामने आने के बाद कलेक्टर, एसपी सहित वरिष्ठ अधिकारी प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे। गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने घर-घर स्क्रीनिंग शुरू की और बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया।

लेकिन यहीं से एक बड़ा सवाल खड़ा होता है—

अगर जहरीली शराब से मौतों की आशंका इतनी गंभीर थी और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद थे, तो अवैध शराब के पूरे नेटवर्क की निगरानी और रोकथाम में चूक आखिर कहां हुई?

आबकारी विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में

इस पूरे घटनाक्रम ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। घटना के बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई की गई और अधिकारियों पर भी गाज गिरने की खबरें सामने आईं।

अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि जहरीली शराब बनाने और बेचने वाले कौन थे?

सवाल यह भी है कि—

इतना बड़ा अवैध कारोबार प्रशासन की नजर से कैसे बचा रहा?

क्या स्थानीय स्तर पर अवैध शराब की बिक्री की शिकायतें पहले से मिल रही थीं?

यदि शिकायतें थीं तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

और सबसे महत्वपूर्ण—

क्या जिम्मेदारी सिर्फ शराब बेचने वालों तक सीमित होगी या पूरे प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही भी तय होगी?

जांच का असली सच सामने आना जरूरी

मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी दिए गए हैं। जांच में शराब तैयार करने, उसके भंडारण और वितरण के साथ-साथ संभावित विभागीय लापरवाही की भी पड़ताल की जानी है।

अब जनता को सिर्फ कार्रवाई की घोषणा नहीं, बल्कि पूरी जांच का स्पष्ट परिणाम चाहिए।

किसने शराब बनाई?

किसने सप्लाई की?

किसने बेची?

किसे इसकी जानकारी थी?

और अगर कहीं प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही हुई तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है?

इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है।

JMS NEWS का सवाल

सरकार का लक्ष्य अगर सच में “नशामुक्त मध्यप्रदेश” बनाना है, तो सिर्फ शराब माफिया के खिलाफ कार्रवाई की घोषणा पर्याप्त नहीं होगी।

जरूरत है ऐसे पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की, जिसमें निर्माण से लेकर परिवहन, भंडारण और बिक्री तक शामिल लोग कानून के दायरे में आएं।

सागर की घटना ने कई परिवारों को उजाड़ दिया है। अब यह सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि जांच केवल कागजों तक सीमित न रहे और दोषियों के साथ-साथ किसी भी स्तर की लापरवाही की जिम्मेदारी भी तय हो।

JMS NEWS की अपील

शराब से नाता तोड़ो,
सेहत और परिवार से नाता जोड़ो।

नशा छोड़िए—जीवन बचाइए।

JMS NEWS

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