मनरेगा का नाम बदलने के खिलाफ कांग्रेस विधायक दल का विधानसभा परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन

भोपाल, 17 दिसंबर 2025: मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलने के प्रस्ताव के खिलाफ कांग्रेस विधायक दल ने आज विधानसभा परिसर में तीखा विरोध प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने धरना दिया और नारे लगाए। यह प्रदर्शन विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र के दौरान हुआ, जहां मनरेगा के नाम परिवर्तन समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा होनी थी। कांग्रेस ने इसे ‘गांधी जी के अपमान’ करार दिया और कहा कि भाजपा जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटका रही है।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस विधायकों ने ‘मनरेगा का नाम मत बदलो, गांधी जी का अपमान मत करो’ और ‘भाजपा हाय-हाय’ जैसे नारे लगाए। उमंग सिंघार ने मीडिया से बातचीत में भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा, “भाजपा सरकार नाम बदलने की राजनीति कर जनता के असली मुद्दों—रोजगार, महंगाई, किसानों और मजदूरों की समस्याओं—से ध्यान भटकाने का काम कर रही है। मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों और मजदूरों के जीवन की गारंटी है, जिसे गांधी जी के नाम से जोड़कर सामाजिक न्याय और स्वाभिमान का प्रतीक बनाया गया था।”
सिंघार ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा, “भाजपा गांधी जी के नाम को बदल रही है—क्या भाजपा को बापू से डर लगता है या फिर वह उनका सम्मान नहीं करती? गांधी जी का नाम हटाना उनके विचारों और संविधान के मूल्यों पर सीधा हमला है। कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि गांधी जी के नाम और उनकी विचारधारा से जुड़े किसी भी प्रतीक के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” उन्होंने आगे कहा कि मनरेगा योजना 2005 में कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई थी और यह ग्रामीण भारत की रीढ़ है, जिसने करोड़ों लोगों को 100 दिनों का गारंटीड रोजगार दिया है। नाम बदलकर भाजपा इसे राजनीतिक रंग देना चाहती है।
प्रदर्शन की मुख्य झलकियां
- स्थान और समय: प्रदर्शन विधानसभा परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने सुबह 10 बजे से शुरू हुआ और विशेष सत्र की शुरुआत तक चला। कांग्रेस के करीब 50 विधायक इसमें शामिल हुए, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, कमलनाथ के पुत्र नकुल नाथ और अन्य वरिष्ठ नेता भी थे।
- नारे और पोस्टर्स: विधायकों ने हाथों में पोस्टर्स लिए थे, जिन पर ‘गांधी जी अमर रहें’, ‘मनरेगा बचाओ, देश बचाओ’ जैसे संदेश लिखे थे। कुछ विधायकों ने गांधी जी की तस्वीरें भी लहराईं।
- सत्र में हंगामा: विशेष सत्र में भी कांग्रेस विधायकों ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। सदन में हंगामा हुआ, जिसके चलते सत्र को कुछ देर के लिए स्थगित करना पड़ा। विपक्ष ने मांग की कि नाम बदलने का प्रस्ताव वापस लिया जाए।
मनरेगा नाम बदलने का पृष्ठभूमि
मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने हाल ही में मनरेगा का नाम बदलकर ‘प्रधानमंत्री ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना’ करने का प्रस्ताव दिया है। सरकार का दावा है कि इससे योजना को और मजबूत किया जाएगा और केंद्र की अन्य योजनाओं से जोड़ा जाएगा। हालांकि, विपक्ष इसे गांधी जी के योगदान को मिटाने की साजिश बता रहा है। मनरेगा योजना के तहत प्रदेश में हर साल लाखों मजदूरों को रोजगार मिलता है, लेकिन हाल के वर्षों में फंडिंग और भुगतान में देरी की शिकायतें बढ़ी हैं। 2025-26 के बजट में योजना के लिए 15,000 करोड़ रुपये का प्रावधान है, लेकिन नाम बदलने से कोई व्यावहारिक फर्क नहीं पड़ेगा, ऐसा विशेषज्ञों का मानना है।
अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएं
- दिग्विजय सिंह: पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा, “भाजपा गांधी जी को भूलना चाहती है, लेकिन राष्ट्रपिता का नाम इतिहास से नहीं मिटाया जा सकता। मनरेगा गांधी जी की ग्राम स्वराज की अवधारणा पर आधारित है।”
- कमलनाथ: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, “यह फैसला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है। हम पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन करेंगे।”
- भाजपा की सफाई: सत्र के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, “नाम बदलने से योजना की भावना नहीं बदलेगी। हम ग्रामीण विकास को मजबूत कर रहे हैं। विपक्ष अनावश्यक राजनीति कर रहा है।”
क्या होगा आगे?
कांग्रेस ने घोषणा की है कि अगर सरकार नाम बदलने पर अड़ी रही तो वे प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ेंगे। ग्रामीण इलाकों में पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मुद्दा 2028 के विधानसभा चुनावों में बड़ा रोल खेल सकता है, क्योंकि मनरेगा ग्रामीण मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण है। फिलहाल, विशेष सत्र में नाम बदलने पर चर्चा जारी है, और अंतिम फैसला शाम तक आने की उम्मीद है।
यह प्रदर्शन कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें वे गांधी जी की विरासत को बचाने के नाम पर भाजपा को घेर रही है। प्रदेश की राजनीति में यह नया मोड़ क्या रंग लाएगा, यह देखना बाकी है। अधिक अपडेट्स के लिए बने रहें।