मध्य प्रदेश कांग्रेस ने एसआईआर में अनियमितताओं, फर्जी मतदाता और कर्मचारियों की मौतों पर जताई गंभीर चिंता
भोपाल। मध्य प्रदेश में चल रही विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि एसआईआर के नाम पर बड़े पैमाने पर मतदाता अधिकारों का हनन, फर्जी तरीके से नाम विलोपन, प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और अत्यधिक दबाव के कारण कर्मचारियों की मौतें सामने आई हैं, जो लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत हैं।

इन्हीं मुद्दों को लेकर आज मध्य प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में एक संयुक्त पत्रकार वार्ता आयोजित की गई, जिसे पूर्व मंत्री श्री सज्जन सिंह वर्मा और सीडब्ल्यूसी सदस्य श्री कमलेश्वर पटेल ने संबोधित किया।
इस अवसर पर मीडिया विभाग अध्यक्ष श्री मुकेश नायक, चुनाव आयोग कार्य प्रभारी श्री जे.पी. धनोपिया, पूर्व संगठन महासचिव श्री राजीव सिंह, मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रभारी श्री ललित सेन सहित प्रदेश प्रवक्ता श्री भूपेंद्र गुप्ता, श्री आनंद जाट, श्री मिथुन अहिरवार एवं श्री जितेंद्र मिश्रा उपस्थित रहे।
ड्राफ्ट मतदाता सूची में गंभीर गड़बड़ियां : सज्जन सिंह वर्मा
पूर्व मंत्री श्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि 23 दिसंबर 2025 को एसआईआर के प्रथम चरण के बाद जारी की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्यापन के नाम पर प्रदेश के 5 करोड़ 31 लाख मतदाताओं में से बड़ी संख्या में मतदाताओं को गलत तरीके से “Not Mapping” की श्रेणी में डाल दिया गया।
उन्होंने कहा कि न तो इन मतदाताओं की कोई अलग सूची मतदान केंद्रों पर चस्पा की गई और न ही चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड की गई, जिससे आम नागरिकों और राजनीतिक दलों को जानकारी ही नहीं मिल पा रही है।
ASDR सूची न मिलने से पारदर्शिता खत्म
श्री वर्मा ने बताया कि ASDR सूची की प्रिंट कॉपी न तो बीएलओ को दी गई और न ही राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराई गई। इसके कारण यह पता लगाना असंभव हो गया है कि किन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया गोपनीयता और भ्रम में रखी गई, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
बूथों में बदलाव, बीएलए की अनदेखी
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान मतदान केंद्रों में मनमाने बदलाव किए गए। कई नए बूथों पर न तो बीएलए नियुक्त किए गए और न ही उन्हें कोई सूचना दी गई, जिससे दावा–आपत्ति प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में कुल 71,930 मतदान केंद्र हैं, जिनमें:
- 65,014 पूर्व अनुमोदित केंद्र
- 1,200 से अधिक मतदाताओं वाले 6,704 नए केंद्र
- 2 किमी से अधिक दूरी पर 230 नए केंद्र
- 18 मतदान केंद्र विलोपित किए गए हैं
आपत्तियों का निराकरण नहीं हुआ तो कानूनी रास्ता अपनाएंगे
श्री सज्जन सिंह वर्मा ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों का अब तक कोई समाधान नहीं किया गया है। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो कांग्रेस संवैधानिक और न्यायिक मार्ग अपनाकर मताधिकार की रक्षा करेगी।
एसआईआर के दबाव से कर्मचारियों की मौतें, सरकार संवेदनहीन : कमलेश्वर पटेल
सीडब्ल्यूसी सदस्य श्री कमलेश्वर पटेल ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान अत्यधिक कार्यभार के कारण कई कर्मचारियों की मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने कहा कि कम समय में अत्यधिक दबाव डालने से कई कर्मचारियों की हार्ट अटैक से मौत हुई, लेकिन न तो सरकार और न ही चुनाव आयोग ने संवेदना व्यक्त की, जो गंभीर असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
42.74 लाख नाम कटे, चुनाव प्रभावित होने की आशंका
श्री पटेल ने दावा किया कि प्रदेशभर में 42.74 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम काटे गए, जबकि 8.42 लाख मतदाताओं को “पता नहीं” बताकर सूची से बाहर कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि 2023 के विधानसभा चुनाव में जहां 30–35 लाख वोटों का अंतर था, वहीं केवल उनकी विधानसभा में ही 16 हजार मतदाताओं के नाम काटे गए, जिससे चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ।
फर्जी और कटे मतदाता लोकतंत्र पर हमला
कमलेश्वर पटेल ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा पहले उठाए गए सवाल आज सच साबित हो रहे हैं। रीवा, ग्वालियर, शिवपुरी और भिंड जैसे जिलों में बड़ी संख्या में फर्जी और गलत तरीके से हटाए गए मतदाता सामने आए हैं। उन्होंने इसे सीधे तौर पर लोकतंत्र पर हमला बताया।
बीएलए को साथ बैठाकर हो निराकरण : जे.पी. धनोपिया
वरिष्ठ कांग्रेस नेता श्री जे.पी. धनोपिया ने कहा कि ड्राफ्ट पब्लिकेशन के समय यह स्पष्ट किया गया था कि मतदाता सूची की प्रतियां बीएलओ को दी जाएंगी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि दावा–आपत्ति के लिए दिया गया एक माह का समय तभी सार्थक होगा, जब निराकरण प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस के बीएलए को भी साथ में बैठाया जाए।
चुनाव आयोग से पारदर्शिता की मांग
श्री धनोपिया ने निर्वाचन आयोग से पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और लोकतांत्रिक तरीके से संचालित करने की मांग की, ताकि किसी भी मतदाता का अधिकार छीना न जाए।
(यह खबर लोकतांत्रिक मूल्यों और मतदाता अधिकारों से जुड़े गंभीर सवालों को उजागर करती है, जिन पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई आवश्यक है।)