भारत भवन सिर्फ एक भवन नहीं, जीवन की रचना है, मुख्यमंत्री ने किया प्रसिद्ध बांसुरी वादक पं. चौरसिया का सम्मान

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भारत भवन सिर्फ एक भवन नहीं, जीवन की रचना है: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
भोपाल।
मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक गौरव के प्रतीक भारत भवन के 44वें स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे “कला, सृजन और संवेदना का जीवंत केंद्र” बताते हुए कहा कि भारत भवन सिर्फ एक भवन या मंच नहीं, बल्कि जीवन की रचना है, जहां कला समाज को जोड़ने का कार्य करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कला समाज में दूरियां मिटाती है, मन का बोझ हल्का करती है और सामाजिक समरसता को मजबूत बनाती है। कला के माध्यम से एक संवेदनशील, सकारात्मक और समृद्ध समाज का निर्माण संभव है।
🎨 44 साल की यात्रा, 440 साल की कामना
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत भवन ने अपने 44 वर्षों में कला और संस्कृति के क्षेत्र में जो योगदान दिया है, वह ऐतिहासिक है।
उन्होंने भावुक अंदाज में कहा—
“44 साल तो तरुणाई है, हमारी कामना है कि भारत भवन की ख्याति अगले 440 वर्षों तक भी इसी तरह बनी रहे।”
मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलन कर 10 दिवसीय स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ किया, जो 22 फरवरी तक चलेगा।
🎶 कला साधकों का सम्मान
समारोह में मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से भोपाल आए पद्म विभूषण से सम्मानित प्रसिद्ध बांसुरी वादक पं. हरिप्रसाद चौरसिया और भारत भवन की न्यासी सदस्या पद्मश्री श्रीमती भूरीबाई को शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा—
“पं. हरिप्रसाद चौरसिया के हाथों में आते ही काष्ठ की बांसुरी में भी प्राण आ जाते हैं। निर्जीव वस्तु भी सजीव हो जाती है— यही कला है, यही साधना है।”
इस अवसर पर भारत भवन के न्यासी सदस्य एवं वरिष्ठ रंगकर्मी राजीव वर्मा, विधायक उमाकांत शर्मा, बड़ी संख्या में कलाकार और कला प्रेमी उपस्थित रहे।
🏛️ कला और संस्कृति का राष्ट्रीय केंद्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत भवन ने बीते 44 वर्षों में कलाकारों को निरंतर मंच देकर इसे देश के विशिष्ट सांस्कृतिक संस्थानों की श्रेणी में स्थापित किया है।
उन्होंने कहा कि भारत भवन ने स्थापित कलाकारों के साथ-साथ नई और उभरती प्रतिभाओं को भी आगे बढ़ने का अवसर दिया है और लोक परंपराओं को आधुनिक संदर्भों से जोड़कर भारतीय संस्कृति की जड़ों को मजबूत किया है।
🌍 मुक्त और शिष्ट सांस्कृतिक प्रवाह का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत भवन सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियों के मुक्त और शिष्ट प्रवाह का केंद्र बन चुका है।
यहां होने वाले कार्यक्रमों में रचनात्मक प्रयोग, विचारों की स्वतंत्रता और सौंदर्य बोध का संतुलित समन्वय दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि सुर-ताल, लोक और शास्त्रीय संगीत, नाट्य मंचन और ललित कलाओं के लिए भारत भवन जैसा मंच विरले ही उपलब्ध होता है।
🌟 भोपाल की सांस्कृतिक पहचान
अपर मुख्य सचिव संस्कृति एवं गृह तथा भारत भवन के न्यासी सचिव शिवशेखर शुक्ला ने कहा कि भारत भवन केवल सांस्कृतिक परिसर नहीं, बल्कि भोपाल शहर की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक बन चुका है।
उन्होंने बताया कि भारत भवन की स्थापना 13 फरवरी 1982 को हुई थी और इसका उद्देश्य भारतीय परंपरा, लोक जीवन और समकालीन कला का समन्वय करना था।
🎭 10 दिवसीय स्थापना दिवस समारोह
44वें स्थापना दिवस पर शुरू हुए 10 दिवसीय समारोह में—
- शास्त्रीय एवं लोक संगीत प्रस्तुतियां
- नृत्य, नाट्य मंचन और कविता-कहानी पाठ
- सिनेमा, विमर्श और कला प्रदर्शनी
- युवा कलाकारों के लिए विशेष कार्यक्रम और कला शिविर
आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य समाज के हर वर्ग को कला और संस्कृति से जोड़ना है।
✨ कला और संस्कृति के संरक्षण का संकल्प
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को स्थापना दिवस की बधाई देते हुए कहा कि राज्य सरकार कला और संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत है और भारत भवन जैसे संस्थानों को हरसंभव सहयोग दिया जाएगा, ताकि हमारी सांस्कृतिक विरासत भावी पीढ़ियों तक सुरक्षित और सशक्त रूप में पहुंच सके।