शांति और मानव जागृति के लिए एक वैश्विक आह्वान – बाबा उमाकान्त जी महाराज,आज, लोग अनियंत्रित इच्छाओं और अनुशासनहीनता के कारण अपने “श्वास पूंजी” को बर्बाद कर रहे हैं

BY LAKHAN GURU JMS NEWS AAP TAK

गोंडा (उत्तर प्रदेश), 4 मार्च।
इतीयाथोक, गोंडा में आयोजित सतसंग में पूज्य Baba Umakant Ji Maharaj ने विश्व शांति और मानव जागृति के लिए एक ऐतिहासिक अपील की। उन्होंने विश्व के सभी नेताओं से आग्रह किया कि वे आपसी मतभेदों को समाप्त कर एक ऐसा वैश्विक समझौता करें जिसमें कोई युद्ध न हो, हथियारों का प्रयोग न हो, किसी देश की जमीन पर कब्जा न किया जाए और हर राष्ट्र की गरिमा का सम्मान किया जाए।

बाबा उमाकान्त जी महाराज ने कहा कि यदि दुनिया के देश इस दिशा में एकजुट होकर निर्णय लें तो लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि आज मानवता अपने ही बनाए घातक हथियारों के कारण बड़े खतरे के सामने खड़ी है। इसलिए समय की आवश्यकता है कि दुनिया शांति, सहयोग और भाईचारे की राह पर आगे बढ़े।

सतसंग में बाबा जी ने मानव जीवन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आदिकाल में मनुष्य की आयु बहुत अधिक होती थी, लेकिन समय के साथ नैतिक मूल्यों के पतन और जीवन शक्ति के दुरुपयोग के कारण मनुष्य की आयु कम होती चली गई। उन्होंने कहा कि आज लोग अनियंत्रित इच्छाओं, अनुशासनहीन जीवनशैली और भोग-विलास में फंसकर अपनी “श्वास पूंजी” को तेजी से नष्ट कर रहे हैं, जिसके कारण असमय मृत्यु की घटनाएं बढ़ रही हैं।

बाबा जी ने कहा कि मानव शरीर केवल भोग के लिए नहीं बल्कि पूजा, भक्ति और आत्म-साधना के लिए मिला है। यदि मनुष्य इस सत्य को समझ ले तो उसका जीवन सफल और सार्थक हो सकता है। उन्होंने कहा कि संसार का असली धन भौतिक संपत्ति नहीं बल्कि “नाम धन” है, जो दीक्षा और ध्यान साधना के माध्यम से प्राप्त होता है।

सतसंग के अंत में बाबा उमाकान्त जी महाराज ने सभी लोगों से संयमित जीवन जीने, आध्यात्मिक साधना अपनाने और मानवता की सेवा करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति के भीतर शांति और जागृति आएगी, तभी विश्व में स्थायी शांति स्थापित हो सकेगी।

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