स्वर्ण जयंती सभागार में नाटक चिन्ह गए हुज़ूर का मंचन ,युवा निर्देशक नितिन तेजराज, लेखक मलय जैन

BY EDITOR LAKHAN LAL FOR JMS NEWS AAP TAK
निरंतर नाट्य संस्था के द्वारा शाम 7 बजे नवीन नाटक चिन्ह गए हुज़ूर का मंचन RCVP प्रशासन अकादमी में संपन्न

अभिनय (एक्टिंग) सीन जिसमें लखन गुरु और पूजा शर्मा
नाटक का निर्देशन युवा निर्देशक नितिन तेजराज के द्वारा किया गया है। नाटक का लेखन साहित्यकार मलय जैन किया है।
नाटक लोकतंत्र के चार स्तंभ में से तीन स्तंभों पर व्यंग्य है। नाटक में शासन, प्रशासन एवं पत्रकारिता पर व्यंग के द्वारा कटाक्ष किया गया है।
नाटक की विषय वस्तु व्यंग्यात्मक होने के कारण नाटक के पात्रों के द्वारा नाटक में संवादों से हास्य उत्पन्न होता है।
कथा सार।
नाटक की कहनी थाने में दरोगा को एक जंगल में एक व्यक्ति की हत्या की खबर मिलने से होती है।
जब दरोगा और मुंशी हत्या की तहकीकात करने जाने ही वाले होता है,तभी थाने में पत्रकार लवली सिंह आ जाती है,उसके बाद नेता अनोखी लाल आ जाते है,दोनों मिलकर दारोगा लोटन प्रसाद को परेशान करने लगते है,साथ में हत्या वाली जगह पर जाने के जिद करने लगते है,सभी लोग जंगल में हत्या वाली जगह पहुंच जाते है।दारोगा हत्या की तहकीकात और गुत्थी सुलझाने की कोशिश करता है। मुंशी घटना स्थल बदलकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करता है।पत्रकार अपने न्यूज़ चैनल के लिए चटपटी खबर बनाता है और नेता उस लाश के ऊपर अपनी राजनीतिक रोटियां सीखने की कोशिश करता है। सभी लोग अपने-अपने स्वार्थ को सिद्ध करने की कोशिश में लगे रहते हैं। इसी दौरान जंगल में अंधेरा हो जाता है और सारे लोग मुसीबत में फंस जाते हैं। जंगल में ही रात हो जाती है।
दरोगा के द्वारा तय किया जाता है,लाश यही रहेगी और बारी बारी से सब लोग लाश की रखवाली करेंगे।
अब कहानी में सस्पेंस और थ्रिलर की इंट्री होती है।
अंधेरी रात ,घनघोर अंधेरा और जंगली जानवरों की आवाजों के बीच लाश उठ कर खड़ी हो जाती है।
लाश उठ कर सबसे बारी बारी से बात करती है,एक एक करके सब भूत भूत कहकर बेहोश हो जाते है।
कहानी के अंत में लाश दारोगा से कहती है इन तीनों को जगाइए।मुंशी,नेता और पत्रकार तीनों को दरोगा जगाता है,सब फिर से डरे हुए है।
लाश कहती है,हम कोई भूत नहीं है।
हम लोकतंत्र है।
लाश लोकतंत्र को कोई मार नहीं सकता,कोई मार नहीं सकता,कोई मार नहीं सकता।
ये था,है और रहेगा।
सब लोग मिलकर एक साथ बोलते है, चिन्ह गए हुज़ूर।
नाटक समाप्त
कलाकार
1 दरोगा लोटन प्रसाद। नितिन तेजराज
- मुंशी। अखिलेश भार्गव
3.पत्रकार लवली सिंह। पूजा शर्मा
4.नेता अनोखी लाल। लखन
5.डाकू चट्टान सिंह रूपेश श्रीवास्तव
6.सिपाही। आयुष कुमार
7.सूचना कर्ता रुद्रांश - लड़की। कंचन गुर्जर।