
देवास/भोपाल। मध्यप्रदेश के देवास जिले में कथित जहरीली और मिलावटी शराब से मौतों का मामला गंभीर विवाद का रूप ले चुका है। चंदाना, बिंजाना और आसपास के गांवों में कई लोगों की मौत के बाद अवैध शराब के कारोबार, आबकारी विभाग की निगरानी, पुलिस की कार्रवाई और जिला प्रशासन की शुरुआती प्रतिक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
28 और 29 अक्टूबर की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने कथित अवैध शराब नेटवर्क के सिलसिले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें मुख्य आरोपी बताए जा रहे अजय राठौर के अलावा इंदौर के कांग्रेस प्रवक्ता आनंद जैन कासलीवाल के बेटे अमन कासलीवाल का नाम भी शामिल है। हालांकि, मौतों की वास्तविक संख्या और उनका जहरीली शराब से संबंध जांच के अधीन है। <Cite refs={[“turn160280search3″,”turn160280search4”]}/>
1. क्या है पूरा मामला?
स्थानीय लोगों के अनुसार, 27 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच चंदाना, बिंजाना और आसपास के इलाकों में शराब पीने के बाद कई लोगों की तबीयत बिगड़ी और मौतें हुईं। कुछ लोगों को उल्टी, चक्कर और दूसरी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां होने की बात भी सामने आई।
मौतों की खबरें सामने आने के बाद जहरीली शराब की आशंका जताई गई। शुरुआत में जिला प्रशासन ने इन मौतों को जहरीली शराब से जोड़ने से इनकार किया था। प्रशासन ने कुछ मौतों के पीछे वृद्धावस्था, सामान्य बीमारियों, ब्रेन हैमरेज, दुर्घटनाओं और पहले से खराब स्वास्थ्य जैसे कारण बताए थे।
इसके बाद मामला तूल पकड़ने पर उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए। मृतकों के विसरा नमूनों, बरामद शराब की बोतलों और अन्य साक्ष्यों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। इसलिए अभी सभी मौतों को जहरीली शराब से हुई मौतें घोषित करना जल्दबाजी होगी। <Cite refs={[“turn160280search1″,”turn160280search5”]}/>
2. कितनी मौतें हुईं? आंकड़ों पर विवाद
इस मामले में मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
- स्थानीय लोगों का दावा: कम से कम 10 लोगों की मौत कथित जहरीली शराब पीने से हुई।
- कांग्रेस का दावा: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 22 लोगों की मौत और कम से कम 40 लोगों की आंखों की रोशनी प्रभावित होने का दावा किया।
- जांच की स्थिति: मीडिया रिपोर्टों में 13 संभावित मौतों का उल्लेख है, लेकिन सभी मामलों में जहरीली शराब से मौत होने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
इन आंकड़ों के बीच अंतर को दूर करना जांच एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती है। मृतकों की सूची, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, अस्पतालों के रिकॉर्ड और फॉरेंसिक नतीजों के आधार पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। <Cite refs={[“turn160280search2″,”turn160280search3″,”turn160280search8”]}/>
3. पुलिस के अनुसार नकली शराब का नेटवर्क कैसे चला?
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, अजय राठौर कथित तौर पर घर पर मिलावटी शराब तैयार करता था। पुलिस का कहना है कि उसने शराब बनाने के तरीके जानने के लिए सितंबर से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और इंटरनेट की मदद ली।
जांच में आरोप है कि इंदौर की एक निजी फर्म से रासायनिक पदार्थ मंगाए गए। इसके बाद कबाड़ कारोबारियों से लाइसेंस प्राप्त ब्रांडों की खाली बोतलें हासिल की गईं। कथित तौर पर मिलावटी शराब को इन बोतलों में भरकर असली शराब के साथ मिलाया गया और ग्रामीण इलाकों में बेचा गया।
पुलिस ने यह भी कहा है कि देवास और इंदौर जिलों की तीन लाइसेंसधारी शराब दुकानों से जुड़े कुछ मैनेजरों और सेल्समैन की कथित भूमिका की जांच हुई है। एक निजी फर्म के गोदाम को भी सील किया गया है।
महत्वपूर्ण: ये पुलिस जांच में सामने आए आरोप हैं। इस्तेमाल किए गए रसायन की पहचान, शराब की विषाक्तता और मौतों से उसका संबंध प्रयोगशाला रिपोर्ट से स्पष्ट होना बाकी है। <Cite refs={[“turn160280search0″,”turn160280search8″,”turn160280search9”]}/>
4. कांग्रेस प्रवक्ता के बेटे अमन कासलीवाल की गिरफ्तारी क्यों हुई?
29 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने इंदौर के कारोबारी अमन कासलीवाल को गिरफ्तार किया। वह मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता आनंद जैन कासलीवाल के बेटे हैं।
पुलिस का आरोप है कि अमन ने मुख्य आरोपी अजय राठौर को कथित तौर पर रसायन की आपूर्ति की थी। इस संबंध में आबकारी कानून के तहत मामला दर्ज किए जाने की खबर है। पुलिस अभी यह पता लगा रही है कि सप्लाई किए गए पदार्थ का वास्तविक स्वरूप क्या था और उसका कथित अवैध शराब निर्माण में इस्तेमाल हुआ या नहीं।
दूसरी ओर, आनंद जैन कासलीवाल ने अपने बेटे को निर्दोष बताया है। उनका कहना है कि उनकी फर्म ने एक ग्राहक को 220 लीटर पेंट थिनर वैध बिल और माल परिवहन संबंधी दस्तावेजों के साथ बेचा था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे को फंसाया जा रहा है।
इसलिए अमन की गिरफ्तारी को जांच में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा सकता है, लेकिन गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। <Cite refs={[“turn160280search3″,”turn160280search4”]}/>
5. अब तक कौन-कौन गिरफ्तार हुआ?
29 अक्टूबर तक प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, इस कथित अवैध शराब नेटवर्क के मामले में कुल 11 गिरफ्तारियां हुई थीं।
पुलिस की कार्रवाई में कथित शराब निर्माता और विक्रेता, अवैध सप्लाई से जुड़े लोग तथा लाइसेंसधारी शराब दुकानों के कुछ मैनेजर और सेल्समैन शामिल बताए गए हैं। अमन कासलीवाल की गिरफ्तारी भी इसी जांच का हिस्सा है।
पुलिस ने छह पेटियों में लगभग 54 लीटर देशी शराब बरामद करने की जानकारी दी थी। मामले में अन्य लोगों की भूमिका और कथित सप्लाई नेटवर्क की जांच भी जारी है।
6. प्रशासन की भूमिका पर सवाल क्यों उठे?
इस मामले में एक बड़ा सवाल यह है कि मौतों की खबर सामने आने के बाद प्रशासन की शुरुआती प्रतिक्रिया क्या थी और अवैध शराब की बिक्री को रोकने के लिए पहले क्या कार्रवाई हुई थी।
जिला प्रशासन ने शुरुआत में जहरीली शराब से मौतों के आरोपों को खारिज किया था। बाद में मामला गंभीर होने और राजनीतिक विवाद बढ़ने पर उच्चस्तरीय जांच गठित की गई।
28 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, देवास के कलेक्टर ऋतुराज और पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोत का तबादला किया गया। नई जिम्मेदारियां नेहा मीना को कलेक्टर और आदित्य मिश्रा को पुलिस अधीक्षक के रूप में दी गईं।
इसके अतिरिक्त, तीन आबकारी अधिकारियों को निलंबित किए जाने की खबर भी सामने आई है। हालांकि, कलेक्टर और एसपी के तबादले को सीधे इस मामले में दंडात्मक कार्रवाई घोषित नहीं किया गया है। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि प्रशासनिक तबादला अपने आप में किसी अधिकारी की आपराधिक जिम्मेदारी साबित नहीं करता। }/>
विपक्ष की क्या भूमिका रही?
देवास शराब कांड में विपक्ष, खासकर कांग्रेस, ने सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने प्रभावित गांवों का दौरा किया और मृतकों के परिवारों से मुलाकात की। कांग्रेस ने 22 मौतों और कम से कम 40 लोगों की आंखों की रोशनी प्रभावित होने का दावा करते हुए वास्तविक मृतक संख्या सार्वजनिक करने, निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
कांग्रेस ने यह सवाल भी उठाया कि यदि अवैध शराब की शिकायतें पहले से मिल रही थीं, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई। पार्टी ने आबकारी व्यवस्था और कानून-व्यवस्था की निगरानी पर भी सवाल खड़े किए। <Cite refs={[“turn160280search2″,”turn160280search5”]}/>
क्या विपक्ष के आरोप साबित हो चुके हैं?
नहीं। विपक्ष के आरोप और राजनीतिक मांगें सार्वजनिक बहस का हिस्सा हैं, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही, शिकायतों की अनदेखी या किसी अधिकारी की मिलीभगत साबित करने के लिए जांच के दस्तावेज और ठोस साक्ष्य जरूरी हैं।
इसी तरह, कांग्रेस प्रवक्ता के बेटे की गिरफ्तारी के आधार पर पूरी पार्टी को इस कथित अवैध कारोबार के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। व्यक्तिगत आरोपों और राजनीतिक जिम्मेदारी का निर्धारण तथ्यों के आधार पर होना चाहिए।
8. सरकार और जांच एजेंसियों के सामने क्या चुनौतियां हैं?
इस मामले में जांच का दायरा केवल शराब बनाने और बेचने वाले आरोपियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। तथ्य सामने लाने के लिए कई बिंदुओं की पड़ताल जरूरी है:
- सभी मृतकों की प्रमाणित सूची और मौत के वास्तविक कारण क्या हैं?
- क्या संबंधित गांवों में बेची गई शराब के नमूनों में जहरीले या प्रतिबंधित पदार्थ मिले हैं?
- रसायन की आपूर्ति किसने की, किस उद्देश्य से की और क्या बिक्री के नियमों का उल्लंघन हुआ?
- कथित मिलावटी शराब किन दुकानों या लोगों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंची?
- क्या पहले कोई शिकायत मिली थी और उस पर क्या कार्रवाई हुई?
- क्या आबकारी विभाग, पुलिस या अन्य अधिकारियों की ओर से कोई प्रमाणित लापरवाही हुई?
- क्या प्रभावित लोगों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिली और पीड़ित परिवारों को सहायता दी गई?
इन सवालों के जवाब पुलिस जांच, फॉरेंसिक रिपोर्ट और उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट से मिलने की उम्मीद है।
9. अब तक क्या निष्कर्ष निकला?
29 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह मामला कथित नकली शराब निर्माण और वितरण के नेटवर्क, मौतों की जांच तथा प्रशासनिक जवाबदेही—तीनों से जुड़ा है।
पुलिस ने 11 लोगों को गिरफ्तार किया है, गोदाम सील किया गया है और शराब तथा मृतकों के नमूने फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। तीन आबकारी अधिकारियों के निलंबन और जिला कलेक्टर तथा एसपी के तबादले की खबरें भी सामने आई हैं।
लेकिन अभी सबसे अहम सवालों के अंतिम जवाब बाकी हैं: वास्तविक रूप से कितनी मौतें शराब के कारण हुईं, किस रसायन का इस्तेमाल किया गया, सप्लाई नेटवर्क में किसकी कितनी भूमिका थी और क्या किसी सरकारी अधिकारी ने अपने कर्तव्य में लापरवाही की।
JMS NEWS AAP TAK की नजर में इस मामले की सबसे बड़ी जरूरत है—मृतकों की सही संख्या सार्वजनिक हो, दोषियों की पहचान सबूतों के आधार पर हो, पीड़ित परिवारों को न्याय मिले और जांच में किसी भी व्यक्ति को केवल राजनीतिक पहचान के आधार पर न दोषी माना जाए, न बचाया जाए।
नोट: यह समाचार 29 अक्टूबर 2026 तक प्रकाशित रिपोर्टों पर आधारित है। जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद तथ्य बदल सकते हैं।