90% सब्सिडी का वादा, 70% कर्ज का बोझ — सोलर पंप योजना में किसानों से विश्वासघात-मुकेश नायक

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग अध्यक्ष मुकेश नायक ने आज प्रदेश सरकार की सोलर पंप योजना को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों से 90% सब्सिडी का वादा किया गया, लेकिन वास्तविकता में किसानों को भारी बैंक ऋण के बोझ तले धकेल दिया गया है।

श्री मुकेश नायक ने कहा कि उपलब्ध आधिकारिक ऋण स्वीकृति पत्रों एवं बैंक दस्तावेजों के अनुसार स्थिति चिंताजनक है

परियोजना लागत लगभग ₹4,04,475 दर्शाई गई।

वास्तविक सब्सिडी मात्र ₹1,09,537 दर्ज की गई।

किसान से ₹41,537 मार्जिन मनी ली गई।

₹2,53,402 का बैंक ऋण किसानों के नाम स्वीकृत किया गया।

84 महीनों तक लगभग ₹3,987 प्रतिमाह EMI निर्धारित।

8.30% ब्याज दर तथा देरी की स्थिति में अतिरिक्त दंड ब्याज।

उन्होंने कहा कि जब 90% सब्सिडी देने का सार्वजनिक दावा किया गया था, तब किसानों को ढाई लाख रुपये से अधिक के बैंक ऋण में क्यों डाला गया?

श्री नायक ने सरकार से सीधे प्रश्न करते हुए कहा—

90% सब्सिडी की घोषणा किस आधार पर की गई?

वास्तविक सब्सिडी प्रतिशत क्या है?
इसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?

क्या किसानों को स्पष्ट रूप से बताया गया कि 10% अंशपूंजी जमा करने के बाद भी उनके नाम पर भारी बैंक ऋण चढ़ेगा?

क्या सोलर कंपनियों को पूर्ण भुगतान बैंक के माध्यम से किया जा चुका है?

क्या इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की कमीशनखोरी या बिचौलियों की भूमिका रही है?

जिन किसानों पर ऋण डाला गया है, उसका पुनर्मूल्यांकन कर शेष राशि सरकार स्वयं वहन करेगी या नहीं?

पूरे प्रकरण की स्वतंत्र न्यायिक जांच कब कराई जाएगी?

श्री नायक ने आगे कहा कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में किसान आज भी खेती के लिए 10 घंटे निरंतर बिजली को तरस रहे हैं। कई गांवों में घरेलू बिजली की भी नियमित उपलब्धता नहीं है। ऐसे में सोलर योजना किसानों के लिए राहत का माध्यम बननी चाहिए थी, लेकिन इसे ऋण योजना में परिवर्तित कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि यह योजना आत्मनिर्भरता का माध्यम नहीं, बल्कि किसानों को कर्जदार बनाने का माध्यम बनती दिखाई दे रही है।

श्री नायक ने भारतीय जनता पार्टी, उसके किसान मोर्चा एवं उससे जुड़े संगठनों से भी पूछा कि इस विषय पर उनका मौन क्यों है? क्या यह मौन सहमति का संकेत है?

अंत में उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत पर राजनीति स्वीकार नहीं की जाएगी। प्रदेश का किसान पारदर्शिता चाहता है, और कांग्रेस पार्टी किसानों की आवाज उठाती रहेगी जब तक स्पष्ट जवाब नहीं मिलता।

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