MPPGCL के इतिहास में पहली बार सफल हुआ ‘ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल’बिजली गुल होने पर भी पावर प्लांट को दोबारा शुरू करने की क्षमता का हुआ सफल परीक्षण, इंदिरा सागर से सतपुड़ा तक पहुंचाई गई बिजली

NEWS BY TEAM JMS NEWS AAP TAK

सारनी/खंडवा। मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) ने विद्युत ग्रिड की आपातकालीन पुनर्बहाली क्षमता को मजबूत करने की दिशा में बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी के इतिहास में पहली बार ‘ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल’ का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह, सारनी और इंदिरा सागर जल विद्युत गृह परियोजना, खंडवा के संयुक्त अभ्यास में संभावित पूर्ण अथवा आंशिक ब्लैकआउट के बाद विद्युत उत्पादन प्रणाली को सुरक्षित और चरणबद्ध तरीके से दोबारा शुरू करने की तैयारियों को परखा गया।

यह महत्वपूर्ण तकनीकी अभ्यास भारतीय विद्युत ग्रिड संहिता (IEGC)-2023 के प्रावधानों के अनुरूप किया गया। मॉक ड्रिल में आपात स्थिति के दौरान ग्रिड पुनर्बहाली, विभिन्न संस्थानों के बीच समन्वय, संचार व्यवस्था और निर्धारित प्रक्रिया की व्यावहारिक जांच की गई।

इंदिरा सागर से सतपुड़ा तक पहुंचाई गई बिजली

सतपुड़ा ताप विद्युत गृह में आयोजित मॉक ड्रिल सुबह 11:30 बजे से दोपहर 1:51 बजे तक चली। अभ्यास के दौरान आयलैंडिंग व्यवस्था के माध्यम से इंदिरा सागर जल विद्युत गृह से विद्युत आपूर्ति लेकर MPPGCL के 500 मेगावाट (2×250 मेगावाट) क्षमता वाले सतपुड़ा ताप विद्युत गृह की आपातकालीन स्टार्ट-अप क्षमता का परीक्षण किया गया।

इस दौरान 400 केवी प्रणाली को चार्ज करने, स्टेशन ट्रांसफॉर्मर को ऊर्जीकृत करने और आवश्यक सहायक विद्युत प्रणालियों को निर्धारित क्रम में बहाल करने की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक परखा गया। पूरे अभ्यास के दौरान विद्युत प्रणाली के महत्वपूर्ण तकनीकी मानकों की लगातार निगरानी की गई।

क्या होता है ब्लैक स्टार्ट?

ब्लैक स्टार्ट विद्युत क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण आपातकालीन प्रक्रिया है। पूर्ण या आंशिक ब्लैकआउट की स्थिति में जब बाहरी ग्रिड से बिजली उपलब्ध नहीं होती, तब स्व-प्रारंभ क्षमता वाले स्रोत की मदद से किसी विद्युत उत्पादन केंद्र की आवश्यक प्रणालियों को पहले ऊर्जा दी जाती है।

इसके बाद निर्धारित क्रम में बड़ी उत्पादन इकाइयों को चालू किया जाता है और धीरे-धीरे विद्युत प्रणाली को सामान्य स्थिति में लाया जाता है। इस प्रक्रिया की नियमित तैयारी किसी बड़े ग्रिड फेलियर की स्थिति में बिजली व्यवस्था को जल्द बहाल करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

आपात स्थिति में समन्वय की भी हुई परीक्षा

मॉक ड्रिल का उद्देश्य केवल विद्युत उत्पादन इकाइयों को दोबारा शुरू करने की क्षमता का परीक्षण करना ही नहीं था, बल्कि पावर प्लांट, स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (SLDC) और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय एवं संचार व्यवस्था को भी परखना था।

अभ्यास के दौरान निर्धारित पुनर्स्थापना प्रक्रिया के प्रत्येक चरण की व्यावहारिक जांच की गई। इससे वास्तविक आपात स्थिति में विद्युत आपूर्ति को सुरक्षित, व्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से बहाल करने की तैयारियों का आकलन हुआ।

MPPGCL के लिए बड़ी तकनीकी उपलब्धि

कंपनी के इतिहास में पहली बार आयोजित इस ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल की सफलता को MPPGCL की परिचालन और तकनीकी तैयारियों की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। अभ्यास ने आपातकालीन परिस्थितियों में विभिन्न तकनीकी टीमों के बीच समन्वय तथा विद्युत उत्पादन प्रणाली की पुनर्बहाली क्षमता को प्रभावी रूप से परखा।

मॉक ड्रिल में स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (SLDC), इंदिरा सागर जल विद्युत गृह परियोजना और सतपुड़ा ताप विद्युत गृह के अभियंताओं एवं तकनीकी कार्मिकों ने सक्रिय सहभागिता की।

इस अवसर पर विद्युत गृह प्रमुख मुख्य अभियंता एस.के. लिल्हौरे, अधीक्षण अभियंता यशवंत वराठे सहित अन्य अभियंता एवं तकनीकी अधिकारी उपस्थित रहे।

ग्रिड सुरक्षा की दिशा में मजबूत कदम

ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल की सफलतापूर्वक पूर्णता से यह स्पष्ट हुआ कि MPPGCL आपातकालीन परिस्थितियों में विद्युत उत्पादन व्यवस्था को तेजी से पुनर्स्थापित करने की दिशा में अपनी तकनीकी क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रही है। यह अभ्यास प्रदेश की ग्रिड सुरक्षा, विद्युत आपूर्ति की विश्वसनीयता और आपदा के समय त्वरित पुनर्बहाली की तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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